छोटे कथावाचक संकटग्रस्त, वैवाहिक आयोजनों की भांति धार्मिक आयोजनों की मिले अनुमति

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राधे कृष्णा जी।

 

महोदय जी! अनलाॅक डाउन का तीसरा चरण है। बड़े कथावाचक लाॅकडाउन से ही आनलाइन अपने आश्रम मे कथा करते रहे हैं क्योंकि स्थान, सुविधा, सिस्टम, व्यवस्था, यजमान आदि सभी बातें उनके अनुकूल थीं। अब रही बात मध्यम कथावाचकों की तो वह इतने समर्थ हैं कि साल दो साल तक उन पर कोई फर्क नही पड़ना। लेकिन वह क्या करें जिनके पास न तो बैठकर खाने की व्यवस्था है और न ही आनलाइन कथा करने की अनुकूल स्थितियाँ। न व्यापारियों की तरह कोई संगठन, जो ज्ञापन  दे सकें। ऐसे लोग सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं जो छोटे मोटे कार्यक्रम करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। आखिर कब तक ऐसे लोग इस समस्या से जूझते रहेंगे। मेरा मानना है कि जिस प्रकार शादी के लिए 30 या 50 लोगों की अनुमति है, उसी प्रकार धार्मिक आयोजन के लिए भी 50 या 60 लोगों एकत्र होने के लिए नियम के अनुकूल अनुमति मिलनी चाहिए। मुझे आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि आप इन लोगों का दर्द समझकर अवश्य ही आवाज उठायेंगे।

 

पंडित राजेश अग्निहोत्री

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