सिंधी जनरल पंचायत ने यमुना महारानी को ओढ़ाई 525 मीटर लम्बी चुनरी

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राम खत्री/किशोर इसरानी। 28 जनवरी 2026

मथुरा। भगवान झूलेलाल के अनुयायियों ने श्रीयमुना महारानी को एक बार फिर चुनरी धारण कराई। सिंधी जनरल पंचायत द्वारा तृतीय चुनरी मनोरथ का आयोजन किया गया, जिसमें पंचायत के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों ने परिवार सहित 525 मीटर लम्बी चुनरी यमुनाजी को ओढ़ाई।

मीडिया प्रभारी किशोर इसरानी ने बताया कि लाला नवलकिशोर नलकूप के पास भिवानी धर्मशाला से गाजे-बाजे के साथ शुरू हुई कलशयात्रा में राधे-कृष्ण की गूंज और श्रीयमुना महारानी और आयोलाल झूलेलाल के जयकारों के मध्य सिंधी समाज के सैकड़ों नर-नारी, बच्चें-बुर्जग नाचते गाते हुए 91 साड़ियों से तैयार चुनरी को सर पर उठाए विश्राम घाट के पास सती घाट पहुंचे, जहां श्रीयमुना महारानी का वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य यमुना पुरोहितों द्वारा पूजन-अर्चन कराया गया।

यमुनाजी को एक पार से दूसरे पार तक लगभग 15 नौकाओं में बैठे श्रद्धालुओं के द्वारा भजन-कीर्तन के साथ चुनरी धारण कराई। चुनरी मनोरथ ठाकुरश्री और यमुना महारानी का जुगल श्रृंगार है। भगवान श्रीकृष्ण की पटरानी यमुना महारानी को अपने हाथों से चुनरी ओढ़ाकर सिंधी भक्त हर्षित हो उठे, उनमें एक अलग ही उत्सव था। हर कोई भक्त जुगल जोड़ी सरकार और जलदेवता झूलेलाल से भक्तिभाव के साथ आनंदभरे सफर की प्रार्थना कर रहा था। यमुना तट भक्ति, श्रद्धा और सिंधी संस्कृति के रंगों से सराबोर रहा। सिंधी समाज के लोगों ने इसे जल संरक्षण, प्रकृति सम्मान और धार्मिक एकता का प्रतीक बताया।

सिंधी जनरल पंचायत के अध्यक्ष नारायणदास लखवानी ने बताया कि सिंधी समाज जल का उपासक है, इसी आस्था के तहत एक बार फिर यमुना महारानी का चुनरी मनोरथ कर पुण्य लाभ का मौका सबको मिला है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से यह आयोजन किया गया।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामचंद्र खत्री ने कहा कि मथुरा में सिंधी समाज यमुना महारानी को ही दरियाशाह मानकर वरूणावतार भगवान झूलेलाल के प्रतीक के रूप में पूजता है, इसी आस्था के तहत चुनरी मनोरथ कराया गया।

उपाध्यक्ष जीवतराम चंदानी एवं प्रदीप उकरानी ने बताया कि सिंधी समाज के ईष्टदेव वरूणावतार भगवान झूलेलाल, जिन्हें दरियाशाह (जलदेवता) भी कहते है, को जल के रूप में पूजा जाता है। भारत की प्राचीन सिंधुनदी से शुरू हुई आस्था वर्तमान में विभिन्न नदियों पर केंद्रित है। सिंधी समाज नजदीकी जलाशयों पर जाकर ही अपनी रस्मों को निभाता है।

कार्यक्रम के विशेष सहयोगी कंहैयालालभाईजी और सुरेश मेठवानी ने कहा कि सिंधी जनरल पंचायत ने चुनरी मनोरथ के माध्यम से समाज को जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है, ऐसे कार्यक्रमों से सबको सेवा का अवसर मिलता है, वहीं समाज की एकता और अखंडता भी कायम रहती है।

जनरल पंचायत के अध्यक्ष नारायणदास लखवानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामचंद्र खत्री, महामंत्री बसंत मंगलानी, उपाध्यक्ष जीवतराम चंदानी, प्रदीप उकरानी, कंहैयालाल भाईजी, सुरेश मेठवानी, जितेंद्र लालवानी, रमेश नाथानी, अशोक अंदानी, सुन्दर खत्री, चंदनलाल आडवानी, झामनदास नाथानी, सुदामा खत्री, हरीश चावला, अनिल मंगलानी, गिरधारी नाथानी, तरूण लखवानी, मिर्चूमल कोतकवानी, विष्णु हेमानी, कंहैयालाल एडवोकेट, राजेश खत्री, दिनेश टेकवानी, अशोक लालवानी आदि परिवारों ने सामुहिक रूप से मिलकर चुनरी ओढ़ाई।

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