उत्तर प्रदेश, मथुरा : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रूबरू हुए राजीव एकेडमी के छात्र-छात्राएं

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मथुरा 1 दिसंबर 2020

राजीव एकेडमी फार टेक्नोलाजी एण्ड मैनेजमेंट के बीसीए विभाग द्वारा शनिवार को बीसीए  द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। वक्ता एमएनसी की सलाहकार आकांक्षा मिश्रा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को परिभाषित करते हुए आज के परिप्रेक्ष्य में इसकी भूमिका स्पष्ट की।

सुश्री मिश्रा ने छात्र-छात्राओं को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कम्प्यूटर साइंस की एक ब्रांच है जिसका मुख्य कार्य ऐसी इंटेलीजेंट मशीन बनाना है जो मनुष्य की तरह ही बुद्धिमान हो, जिसमें स्वयं निर्णय लेने की क्षमता हो ताकि वह हमारे तमाम कार्य आसानी से कर सके।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तीन प्रोसेस होते हैं। पहला लर्निंग जिसके द्वारा मशीनों के दिमाग में इम्फार्मेशन डाली जाती है और उन्हें कुछ रूल्स सिखाए जाते हैं जिससे कि वे उनका पालन करते हुए प्राप्त टास्क को पूरा कर सकें। दूसरा रीजनिंग अर्थात इसके अंतर्गत मशीनों को यह निर्देश दिया जाता है कि वो उन बनाए गए रूल्स का पालन करके रिजल्ट की तरफ अग्रसर हो जिससे कि उन्हें एप्राक्सिमेट या डेफिनिट कनक्लूजन हासिल हो। तीसरा प्रोसेस सेल्फ करेक्शन होता है जोकि सुपरवीजन का काम करता है।

सुश्री मिश्रा ने कहा कि एआई को इस प्रकार से बनाया गया है कि वह मानव की तरह सोच सके, मानव के दिमाग की तरह प्राब्लम को पढ़ सके, फिर उसे कार्यान्वित करे, निश्चित करे कि क्या उचित होगा और फायनली उस प्राब्लम को विशेष रूप से साल्व करे। उन्होंने एआई के लक्ष्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत ऐसे सिस्टम बनाए जाते हैं जो इंटेलिजेंस विहैवियर का प्रदर्शन कर सकें, लर्न कर सकें, डेमोस्ट्रेट, एक्सप्लेन और इसके साथ अपने यूजर को एडवाइस दे सके। यह ऐसी टेक्निक है जिससे कि हम ज्ञान या नालेज को ऐसे आर्गनाइज्ड में रखेंगे कि जैसे हम इसका प्रयोग बहुत एफिसिएण्टली कर सकते हैं। ये पढ़ने और समझने योग्य होना चाहिए, ये आसानी से मोडीफाई करने योग्य होना चाहिए जिससे इसकी गलतियों को आसानी से सुधारा जा सके। 

मिश्रा ने बताया कि एआई को चार हिस्सों में कैटेगराइज किया गया है जैसे टाइप वन, टाइप टू, टाइप थ्री, टाइप फोर अर्थात डीप ब्लू, लिमिटेड मेमोरी, थ्योरी आफ माइण्ड, सैल्फ अवेयरनेस। एआई के बारे में उन्होंने मशीन लर्निंग, मशीन विजन, एनएलपी, रोबोटिक फील्ड आदि के उदाहरण दिए। संस्थान के निदेशक डा. अमर कुमार सक्सेना ने वक्ता आकांक्षा मिश्रा का आभार मानते हुए छात्र-छात्राओं के लिए कार्यशाला को बहुत उपयोगी बताया।

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