तृतीय गृह एकादश गृहाधीश श्रीबालकृष्णलालजी महाराज - 2

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।।श्रीद्वारकेशो जयति।।

तृतीय गृह गौरवगान

प्रसंग:- 212

तृतीय गृह एकादश गृहाधीश श्रीबालकृष्णलालजी महाराज - 2

कल के प्रसंग में श्रीबालकृष्णलालजी का प्राथमिक परिचय प्राप्त कर लेने के बाद आज उनके तृतीय गृह के तिलकायित पद पर विराजने की घटना का विवरण देखते हैं, और तत्पश्चात् उनके पारिवारिक जीवन की जानकारी प्राप्त करेंगें।

"सं.1936 कार्तिक कृ.7 गुरुवार के दिन महाराज श्रीबालकृष्ण- लालजी का कांकरोली के तिलकायित के स्थान पर विराजना हुआ और महाराणा सज्जनसिंहजी ने कांकरोली आकर राजकीय दस्तूर कर भेंट की। इस समय महाराजश्री की अवस्था केवल 12 वर्ष की थी, अतः ठिकाने की सारी जिम्मेदारी पुनः एक बार माजी महाराज ही सँभालती रहीं। उस समय उन्हीं के नाम से प्रबन्ध होता था। जैसा कि  हम श्रीपद्मावती माजी महाराज के चरित्र में देख आये हैं,  इसी दिन महाराणा सज्जनसिंहजी द्वारा कांकरोली ठिकाने के लिए प्रबन्धार्थ 10 कलमें लागू की गईं, जिसे हम आन्तरिक शासन की अधिकार-प्राप्ति कह सकते हैं।"

"महाराजश्री ने माजी महाराज की आज्ञानुसार श्रीद्वारकाधीश की सेवा और कांकरोली ठिकाने का प्रबन्ध करना सीखा। श्रीप्रभु की सेवा वे अत्यन्त मनोयोग के साथ करने लगे, और साथ ही विद्याव्यासंग भी।"

"सं.1940 चैत्र कृ.6 को बालकृष्णलालजी का प्रथम विवाह श्रीपार्वती बहूजी के साथ हुआ। कुछ ही वर्षों में प्रथम पत्नी के दिवंगत हो जाने पर सं.1949 आषाढ़ शु.4 सोमवार को गो.मग्नलालजी महाराज की दौहित्री और करंजी- भूपतलालाजी की पुत्री श्रीमती सौन्दर्यवती के साथ दूसरा विवाह किया।"

"द्वितीय धर्मपत्नी श्रीसौन्दर्यवती बहूजी से बालकृष्णलालजी महाराज के निम्नलिखित सन्तति हुई -

1.श्रीद्वारकेशलालजी (प्रा.सं.1964 आषाढ़ कृ.6)

2.श्रीपुरुषोत्तमलालजी (प्रा.सं.

1966 कार्तिक कृ.6)

3.श्रीव्रजभूषणलालजी (प्रा.सं.

1968 फाल्गुन कृ.2)

4.श्रीविट्ठलनाथजी (प्रा.सं.

1970 माघ कृ.9)"

"श्रीबालकृष्णलालजी के प्रथम पुत्र श्रीद्वारकेशलालजी का छोटी अवस्था में ही निधन हो गया। उनका यावल्लब्ध चरित्र आगे लिखा जायेगा। द्वितीय पुत्र पुरुषोत्तमलालजी का अपने पिता की उपस्थिति में ही सं.1969 चैत्र बदी 9 के दिन देहविलय हो गया। यह भी बड़े सुन्दर और होनहार बालक थे।"

आज का प्रसंग यहीं पर समाप्त करते हुए, कल से श्रीबालकृष्णलालजी के चरित्र की महत्त्वपूर्ण घटनाओं का अवगाहन आरम्भ करेंगें।

आज यहाँ दिये जा रहे प्राचीन चित्र मेंं श्रीबालकृष्णलालजी महाराज अपनी गोद में अपने दो पुत्रों- श्रीद्वारकेशलालजी एवं श्रीपुरुषोत्तमलालजी को लिये हुए  दृश्यमान हो रहे हैं।

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