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आयुर्वेद का इस्तेमाल कोरोना से बचा सकता है : डा.राजकुमार

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संस्कृति विवि द्वारा आयोजित वेबिनार में बोलते निदेशक उत्तर प्रदेश आयुर्वेदिक सेवाएं प्रोफेसर एसएन सिंह।  

आयुर्वेद का इस्तेमाल कोरोना से बचा सकता है : डा.राजकुमार

संस्कृति आयुर्वेद कालेज ने आयोजित की महत्वपूर्ण वेबिनार

 

किशन चतुर्वेदी

मथुरा 15 जून 2020

 

संस्कृति आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल द्वारा आयोजित “इम्युनिटी बूस्टर एंड कोविड-19 प्रिंवेटिव मेसर्स फार चिल्डरन” विषयक सेमिनार में मुख्यवक्ता यूपी यूनिवर्सिटी आफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सैफईं इटावा के कुलपति प्रोफेसर (डा.) राजकुमार ने विश्व को झकझोरने वाली महामारी कोरोना से बचाव के लिए आयुर्वेद के प्रभावकारी इस्तेमाल के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि आयुर्वेद में उल्लेखित ऐसी अनेक जड़ी बूटियां हैं जिनका इस्तेमाल कर लोग इस कोविड-19 के प्रकोप से अपना बचाव कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के माध्यम से शीघ्र ही विश्व कोरोना से मुक्त पाएगा। हमने इससे निपटने के लिए औषधि तैयार कर ली है, लगातार प्रशिक्षण चल रहे हैं। इस औषधि का नाम ‘राज निर्वाण’ बूटी दिया गया है।

 

 

सेमिनार में गेस्ट आफ आनर निदेशक उप्र आयुर्वेदिक सेवाएं ने कहा कि आज कोरोना महामारी से जूझने में आयुर्वेद एक बड़ी भूमिका निर्वाह कर रहा है। संस्कृति विवि के चेयरमैन और देश के सबसे युवा कुलाधिपति सचिन गुप्ता के नेतृत्व में संस्कृति आयुर्वेद कालेज बच्चों की इम्युनिटी में सरकार के कार्यक्रमों में विशेष सहयोग प्रदान कर सकता है। प्रोफेसर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की आयुर्वेदिक सेवाओं द्वारा अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिसमें आयुष आपके द्वार, स्कूल हेल्थ प्रोग्राम, स्वर्ण पाशन्न संस्कार आदि हैं। इनके द्वारा आयुर्वेद के उपयोगी प्रयोग के प्रति लोगों को जागरूक तो किया ही जा रहा है, साथ ही साथ उनको स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं भी दी जा रही हैं। 

 

उन्होंने कहा की कोराना से बचाव के लिए आयुर्वेद की जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़ा वितरित किया जा रहा है। संस्कृति विवि द्वारा भी ग्रामीण क्षेत्र में आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार तैयार काढ़ा वितरित किया गया है। जहां तक बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने की बात है तो उसके लिए हमारे कार्यक्रमों द्वारा बच्चों के खानपान, व्यायाम तथा आयुर्वेद की औषधियों की जानकारी दी जा रही है। लोगों को आयुर्वेद की जड़ी-बूटियों के पौधे लगाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।   

 

उन्होंने बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता का महत्व बताते हुए कहा कि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता को आयुर्वेद के पारंपरिक तरीकों को अपनाकर बढ़ाया जा सकता है। इस बारे में वेबिनार में ज्ञानवर्धक जानकारी भी दी। साथ ही भारत में कोरोना महामारी का मुकाबला करने के लिए पारंपरिक उपचार पद्धति में आयुर्वेद के प्रयोग की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। राजकीय आयुर्वेदिक कालेज लखनऊ में कौमार्य भृत्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डा.) मिथलेश वर्मा ने बाल स्वास्थ्य पर कोविड-19 के संदर्भ में उपयोगी वक्तव्य दिया। आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर ने बच्चों पर इस महामारी के कारण पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला और बच्चों की देखभाल के लिए रसायन के प्रयोग के महत्व को बताया। 

 

वेबिनार में आयुर्वेद कालेज के सभी छात्र-छात्राओं और चिकित्सकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इससे पूर्व संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डा. राणा सिंह व एकेडमिक डीन सुरेश कासवान में अतिथियों का परिचय देते हुए स्वागत किया। वेबिनार का समापन संस्कृति विवि की विशेष कार्याधिकार मीनाक्षी शर्मा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।


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