वर्ष 2026 का प्रथम चन्द्र ग्रहण तीन मार्च को, विशेष जानकारी

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मथुरा।

वर्ष 2026 का प्रथम चन्द्र ग्रहण 3 मार्च फाल्गुन पूर्णिमा को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र सिंह राशि में ग्रस्तोदित चन्द्र ग्रहण लगेगा। इस सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देने के उद्देश्य से दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान द्वारा मंथन गोष्ठी की गई जिसमें संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि फाल्गुन पूर्णिमा को वर्ष 2026 का प्रथम चन्द्र ग्रहण मध्याह्न 03 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और सायं 06 बजकर 47 मिनट पर मोक्ष होगा। ग्रहण से 09 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा।
गोष्ठी में आचार्य ब्रजेन्द्र नागर, ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक चतुर्वेदी ने कहा कि यह ग्रहण सम्पूर्ण एशिया, आस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, उत्तरी तथा दक्षिणी अमेरिका एवं रुस में 15.20 से 18.47 तक दिखाई देगा परन्तु भारत में यह ग्रहण अधिकतम 24 मिनट तक मोक्ष के रूप में दिखाई देगा। 
गोष्ठी में साहित्याचार्य शरद चतुर्वेदी, ज्योतिषाचार्य पंकज चतुर्वेदी,सौरभ शास्त्री ने कहा कि चन्द्र ग्रहण पर शास्त्रोक्त नियमों का पालन करना चाहिए सूतक काल में आचार विचार को ध्यान में रखें। ग्रहण के समय भगवान का जाप करें। वृद्ध और बीमार लोगों को छोड़कर सभी को सूतक काल में खानपान से बचना चाहिए। ग्रहण मोक्ष होने के बाद स्नान आदि करके घर की शुद्धि करें।
इस अवसर पर मनोज पाठक, मनीष पाठक, निरंजन शास्त्री, ऋषभ देव, गोविंद देव, आदि ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चन्द्र ग्रहण में विशेषकर गर्भवती महिलाओं को सावधानी रखनी चाहिए और जिनकी कुंडली में चन्द्र की महादशा या अंतर्दशा चल रही हैं वे भी सावधानी बरतें।
प्रेषक ज्योतिषाचार्य दीपक चतुर्वेदी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण की व्युत्पत्ति, ग्रहण का अर्थ होता है अपनी तरफ लेना जब ग्राहक के ग्राह्य पदार्थ को अपनी तरफ लिया जाता है उसी को ग्रहण कहते हैं।

चंद्र ग्रहण का मुख्य कारण भूभा अर्थात पृथ्वी की काली छाया होती है।
सूर्य चंद्रमा को यदि ग्रहण लगता है तो राहु अथवा केतु साथ में अवश्य रहेगा तभी ग्रहण संभव है।
पंकज ज्योतिषाचार्य

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