2026 में बृजवासियों के लिए विकास की नई किरणें दिखाई देंगी- ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी

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नए अंग्रेजी वर्ष 2026 का आगमन बृज क्षेत्र के लिए शुभ संकेत लेकर आ रहा है। ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार, 1 जनवरी 2026 को रात्रि 12 बजकर 01 मिनट पर कन्या लग्न रहेगा, जिसमें चार ग्रहों की युति बनेगी। वहीं, सूर्योदय कुंडली में धनु लग्न का उदय होगा, उच्च राशि के चंद्रमा और शुभ योगों के साथ नया वर्ष प्रवेश करेगा।

साहित्य आचार्य शरद चतुर्वेदी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा में पहले से अधिक दिव्यता और भव्यता के साथ दर्शन के योग बन रहे हैं। साथ ही मधुपुरी, वृंदावन एवं श्री यमुना जी में अविरल और निर्मल जलधारा के शुभ संयोग बनेंगे।

उन्होंने कहा कि श्री यमुना जी के लिए भक्तों द्वारा लंबे समय से किए जा रहे प्रयास अब फलीभूत होंगे, और यमुना के घाटों पर नयनाभिराम छटा देखने को मिलेगी।

नए वर्ष में जेठ मास अधिक मास का रहेगा, जिसका धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होगा।

आचार्य बृजेंद्र नागर एवं पंडित नारायण प्रसाद शर्मा ने बताया कि विक्रम संवत 2083 में राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल ग्रह होंगे। चार ग्रहों की युति के साथ नवीन विक्रम वर्ष का शुभारंभ होगा।

हालांकि, वर्ष 2026 में भारत सहित विश्व पटल के लिए कुछ कठिन समय भी सामने आ सकते हैं। ज्योतिषाचार्य दीपक पंकज के अनुसार, 20 जुलाई से 10 दिसंबर 2026 तक शनि ग्रह वक्री रहेगा, इस अवधि में ग्रहों के कुप्रभाव के कारण देश-दुनिया को बार-बार विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

इसके साथ ही यह भी संकेत हैं कि भारत नए वर्ष में कई देशों के साथ व्यापारिक समझौते करेगा, जो इसी वर्ष लागू भी होंगे।

ज्योतिषाचार्य मनोज मनीष पाठक ने ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए धार्मिक उपाय करने की सलाह दी है।

वहीं सौरभ शास्त्री ऋषभ देव ने बताया कि अखंड रामायण पाठ, सुंदरकांड पाठ, हवन-यज्ञ, रुद्राभिषेक एवं रुद्री पाठ जैसे धार्मिक अनुष्ठान अत्यंत आवश्यक होंगे, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

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