केशवधाम वेद विद्यालय में पूर्ण वैदिक परम्परा के अनुसार कराए गए, सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार

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रामदास चतुर्वेदी। मथुरा 21 अप्रैल 2026

प्राचीन वैदिक परम्परा को संरक्षित, संवर्धित, करने और वैदिक परम्परा के प्रचार, प्रसार के माध्यम से सनातन संस्कृति को घर घर पहुंचाने के व्यापक संकल्प को लेकर निरंतर प्रति वर्ष सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार कराकर वैदिक ब्राह्मणों को प्राचीन वैदिक सनातन धर्म की मर्यादाओं को समाज के मध्य स्थापित करने के उद्देश्य के साथ, मथुरा पुरी बृजमंडल के वृन्दावन धाम में स्थित केशवधाम वेद विद्यालय में अक्षय तृतीया के महापर्व पर ,वेद विद्यालय द्वारा दशम यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन केशवधाम वेद विद्यालय में दो दिवसीय उपनयन संस्कार के रूप में किया गया, वेद पाठन आरम्भ करने से पूर्व यज्ञोपवीत संस्कार परम आवश्यक है।

यज्ञोपवीत संस्कार में बटुक ब्राह्मणों को वेदारम्भ संस्कार ब्रह्मदण्ड धारण कराया गया साथ ही हवन के साथ तथा  गायत्री दीक्षा के साथ संध्या बंधन का दिव्य और अद्भुत ज्ञान प्रदान कराया गया। इस अवसर पर बीतराग संत श्री गोविन्दानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि यज्ञोपवीत बालकों को अवश्य कराना चाहिए। ब्राह्मण का यज्ञोपवीत 8 वर्ष में क्षत्रिय का 11 वर्ष में एवं वैश्य का 12 वर्ष में होना चाहिए। यज्ञोपवीत का महत्व बताते हुए माहाराज श्री ने कहा कि यज्ञोपवीत और शिखा दोनों ही व्यक्ति को श्रेष्ठ ऊर्जावान बनाते हैं तथा सूर्य की ऊर्जा विद्या प्रदान करती है। मुख्य वक्ता आचार्य डॉ रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि वेद साक्षात भगवान हैं। वेद का अध्ययन बिना यज्ञोपवीत के नहीं करना चाहिए ,जब यज्ञोपवीत संस्कार होने के बाद बटुक वेद अध्ययन करके यज्ञ कराते हैं। तब निश्चित ही यज्ञ सफल होता है। संध्यावंदन नित्य करने से ब्रह्मतेज प्रकट होता है एवं ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है। गायत्री साधना व्यक्ति को भौतिक जगत् में साधन सम्पन्नता एवं अध्यात्म जगत में अध्यात्म ऊर्जा प्रदान करती है। संत श्री सतमित्रानंद जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति का चरित्र ही उसके चित्र की पूजा कराता है, जब हम यज्ञोपवीत धारण करके अपने संस्कारों के साथ दैनिक कर्मों को करते हुए आध्यात्मिक कर्म करते हैं तो निश्चित ही हमारा जीवन सफल होता है। अध्यक्षता करते हुए श्री लक्ष्मण सराफ ने कहा कि
आज यह संस्कार सभी समाज के लिए आवश्यक है, केशव धाम निदेशक ललित कुमार जी ने कहा कि वैदिक सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए सभी को यज्ञोपवीत धारण करना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए श्री ओमप्रकाश बंसल जी ने कहा के केशव धाम वेद विद्यालय में विगत 10 वर्षों से यज्ञोपवीत संस्कार विधि विधान से किया जाता है  इस वर्ष 12 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार, वेदारंभ किया गया तथा वेद आदि का अध्ययन भी बच्चों को कराया जाता है। कार्यक्रम का संचालन आचार्य श्री ब्रजेंद्र नागर जी ने किया। इस अवसर पर श्री विश्वनाथ गुप्ता, गंगाधर अरोड़ा, वेद विद्यालय प्रधानाचार्य आचार्य रवीन्द्र शर्मा आचार्य सुधाकर द्विवेदी संदीप चतुर्वेदी आदि सहित अनेकों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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