प्राचीन श्री दीर्ध विष्णु मंदिर में अक्षय तृतीया पर्व पर चंदन श्रृंगार कर, परशुराम स्वरूप में किया पूजन अर्चन

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रामदास चतुर्वेदी। 20 अप्रैल 2026

उत्तर भारत के प्रमुख मथुरा पुरी बृजमंडल तीर्थ क्षेत्र के प्राचीन श्री दीर्ध विष्णु मंदिर में अक्षय तृतीया महापर्व पूर्ण वैदिक परम्परा के अनुसार मनाया गया।
वैशाख शुक्ल तृतीया को वैदिक सनातन संस्कृति में अक्षय तृतीया को पुण्य पर्व दिवस माना गया है, सनातन संस्कृति की मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए, पूजन, अर्चन,दान, पुण्य और ठाकुर जी की सेवा का अक्षय पुण्य लाभ मिलता है।
आज ही के दिन सनातन संस्कृति की मर्यादाओं को पुर्नस्थापित करने के लिए भगवान परशुराम स्वरूप में प्रकट हुए,यह पर्व परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
मथुरा पुरी बृजमंडल तीर्थ क्षेत्र के प्राचीन श्री दीर्ध विष्णु मंदिर में प्रातः काल मंगला आरती पश्चात् भगवान के श्री विग्रह का शीतल सुगंधित जल से अभिषेक किया गया, ठाकुर जी के श्री अंग पर सुगंधित, चन्दन,खस,गुलाब इत्यादि इत्रों का लेपन कर ठाकुर श्री दीर्घ विष्णु भगवान  एवं पद्मालयी महालक्ष्मी जी का केसर कपूर युक्त चन्दन से भव्य श्रृंगार किया गया, ठाकुर जी को हल्के पीत वस्त्र धारण कराए गए और तुलसी माला सहित सुगंधित ऋतु अनुकूल पुष्प मालाएं ठाकुर जी को समर्पित कर , परशुराम जयंती के महापर्व पर वैदिक मंत्रोच्चारण से पूजन अर्चन किया।
ठाकुर जी के समझ, सहस्त्रनाम स्तोत्र पाठ किए गए।
सांयकाल ठाकुर जी को सुगंधित फूल मंडली में विराजमान किया गया।
महिला मंडली द्वारा मंगल गीत,भजनो का गायन कर, अक्षय तृतीया के पद सुनाए गए।
इस अवसर पर श्री दीर्घ विष्णु मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष, श्री दीर्ध विष्णु के सेवायत महंत कान्तानाथ चतुर्वेदी, प्रवक्ता रामदास चतुर्वेदी शास्त्री, सेवा संस्थान के मार्गदर्शक आचार्य ब्रजेंद्र नागर, संयोजक कन्हैयालाल अग्रवाल,सेवायत बालकृष्ण चतुर्वेदी, लालकृष्ण चतुर्वेदी सहित मथुरा पुरी बृजमंडल तीर्थ क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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