मृत शरीर को मुखाग्नि के लिए करना पड़ा इतना इंतजार

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गोवर्धन। (मनीष शर्मा)

गिरिराज जी की नगरी गोवर्धन, जहाँ लोग मोक्ष की कामना लेकर आते हैं, वहाँ एक मृत देह को अग्नि देने के लिए परिजनों को 6 घंटे तक संघर्ष करना पड़ा। मामला राधाकुंड छोटी परिक्रमा मार्ग के चुतर टेका का क्षेत्र का है, जहाँ श्मशान की जमीन को लेकर हुए विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि अंतिम संस्कार रुक गया। एक तरफ पूर्वजों की विरासत का दावा था, तो दूसरी तरफ कथित अवैध कब्जाधारियों की अड़चन।  
मृतका वृद्धा के परिजनों का दावा है कि जिस जमीन पर वे दाह संस्कार करने पहुंचे थे, वह उनके पूर्वजों की है। वहां पहले से ही उनके पूर्वजों की समाधियां बनी हुई हैं। हालांकि, जब वे शव लेकर वहां पहुंचे, तो कुछ बंगाली वावाओ ने जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए अंतिम संस्कार करने से रोक दिया। परिजनों का आरोप है कि जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है।विवाद की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कब्जाधारी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं था। हंगामा बढ़ता देख लेखपाल पटवारी और पुलिस के आला अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया।जब समझाने से बात नहीं बनी, तो पुलिस ने अड़चन डालने वाले नामजद लोगों को हिरासत में लिया और थाने ले गई। जिसके बाद लेखपाल और पटवारी ने जमीन के कागजात और रिकॉर्ड खंगाले। और घंटों चली जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि अंतिम संस्कार करने आए लोगों का दावा सही था। इसके बाद करीब 6 घंटे की देरी से चिता जलाई जा सकी। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अंतिम विदाई जैसे संवेदनशील समय पर इस तरह की राजनीति और कब्जा करना मानवता के खिलाफ है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है और जमीन से जुड़े अन्य तथ्यों का भी पता लगाया जा रहा है।

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