आज की कहानी प्रकृति के गणित
- 6 years ago
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- Jeevan Mantra
एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे । वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे ।
थोड़ी देर में वहां एक आदमी आया और वो भी उन दोनों के साथ बैठकर गपशप करने लगा ।
_कुछ देर बाद वो आदमी बोला उसे बहुत भूख लग रही है, उन दोनों को भी भूख लगने लगी थी ।
पहला आदमी बोला मेरे पास 3 रोटी हैं,दूसरा बोला मेरे पास 5 रोटी हैं, हम तीनों मिल बांट कर खा लेते हैं।_
उसके बाद सवाल आया कि 8 (3+5) रोटी तीन आदमियों में कैसे बांट पाएंगे ??
पहले आदमी ने राय दी कि ऐसा करते हैं कि हर रोटी के 3 टुकडे करते हैं, अर्थात 8 रोटी के 24 टुकडे (8 X 3 = 24) हो जाएंगे और हम तीनों में 8 - 8 टुकड़े बराबर बराबर बंट जाएंगे।
तीनों को उसकी राय अच्छी लगी और 8 रोटी के 24 टुकडे करके प्रत्येक ने 8 - 8 रोटी के टुकड़े खाकर भूख शांत की और फिर बारिश के कारण मंदिर के प्रांगण में ही सो गए ।
सुबह उठने पर तीसरे आदमी ने उनके उपकार के लिए दोनों को धन्यवाद दिया और प्रेम से 8 रोटी के टुकड़ों के बदले दोनों को उपहार स्वरूप 8 सोने की गिन्नी देकर अपने घर की ओर चला गया ।
उसके जाने के बाद दूसरे आदमी ने पहले आदमी से कहा हम दोनों 4 - 4 गिन्नी बांट लेते हैं ।
पहला आदमी बोला नहीं मेरी 3 रोटी थी और तुम्हारी 5 रोटी थी, अतः मैं 3 गिन्नी लुंगा, तुम्हें 5 गिन्नी रखनी होगी ।
इस पर दोनों में बहस होने लगी ।
इसके बाद वे दोनों समाधान के लिये मंदिर के पुजारी के पास गए और उन्हें समस्या बताई तथा समाधान के लिए प्रार्थना की ।
पुजारी भी असमंजस में पड़ गया, दोनों दूसरे को ज्यादा देने के लिये लड़ रहे है । पुजारी ने कहा तुम लोग ये 8 गिन्नियाँ मेरे पास छोड़ जाओ और मुझे सोचने का समय दो, मैं कल सवेरे जवाब दे पाऊंगा ।
पुजारी को दिल में वैसे तो पहले आदमी की 3-5 की बात ठीक लग रही थी पर फिर भी वह गहराई से सोचते-सोचते गहरी नींद में सो गया।
कुछ देर बाद उसके चिंतन में गहरा उतरने पर वस्तु व्यवस्था का एवं पुण्य पाप का खेल भी ख्याल में आया तो पुजारी ने सब बातें समझी और नैतिक न्यायिक मार्गदर्शन के लिए यह विचार किया कि मेरे ख्याल से 3 - 5 बंटवारा ही उचित लगता है ।
परंतु गहराई से सोचने पर बात ख्याल में आई,
पहले आदमी को 1 गिन्नी मिलनी चाहिए और दूसरे आदमी को 7 गिन्नी मिलनी चाहिए ।_
प्रभु, कितनी सुंदर वस्तु व्यवस्था है ?
पुजारी फिर एक बार मुस्कुरायाऔर बोला :
इसमें कोई शंका नहीं कि पहले आदमी ने अपनी 3 रोटी के 9 टुकड़े किये परंतु उन 9 में से उसने सिर्फ 1 बांटा और 8 टुकड़े स्वयं खाया अर्थात उसका त्याग सिर्फ 1 रोटी के टुकड़े का था इसलिए वो सिर्फ 1 गिन्नी का ही हकदार है ।
दूसरे आदमी ने अपनी 5 रोटी के 15 टुकड़े किये जिसमें से 8 टुकड़े उसने स्वयं खाऐ और 7 टुकड़े उसने बांट दिए । इसलिए वो न्यायानुसार 7 गिन्नी का हकदार है .. ये ही मेरा गणित है और ये ही मेरा न्याय है !
कर्म की न्याय का सटिक विश्लेषण विचार कर पुजारी नतमस्तक हो गया।
इस कहानी का सार ये ही है कि हमारी वस्तुस्थिति को देखने की, समझने की दृष्टि और कर्म सिद्धांत एकदम भिन्न है । हम पूर्व पार्जिद पाप पुण्य की न्यायलीला को जानने समझने में सर्वथा असमर्थ हैं ।
हम अपने त्याग का गुणगान करते है, परंतु कर्म हमारे त्याग की तुलना हमारे सामर्थ्य एवं भोग तौल कर यथोचित निर्णय करते हैं ।
यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम कितने धन संपन्न है, महत्वपूर्ण यहीं है कि हमारे सेवाभाव कार्य में त्याग कितना है।
????????जय जिनेंद्????????
???? जिनशासन प्रभावना जबलपुर

