प्रभु, बुढ़ापा ऐसा देना...

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  • Jeevan Mantra

प्रस्तुति - लख्मी चंद खत्री

 

प्रभु, बुढ़ापा ऐसा देना

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प्रभु, बुढ़ापा ऐसा देना।

 कि हलवा पूरी गटक सकूं

  और चबा सकूं मैं चना चबैना।। 

प्रभु, बुढ़ापा ऐसा देना। 

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मेरे तन की शुगर ना बढ़े,

 रहे मिठास जुबाँ की कायम। 

तन का लोहा ठीक रहे

 और मन में लोहा लेने का दम।।

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चलूँ हमेशा ही मैं सीधा,

मेरी कमर नहीं झुक जाए। 

यारों के संग, हंसी ठिठौली,

मिलना जुलना ना रुक जाए,

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जियूं मस्त मौला बन कर मैं,

 काटूँ अपने दिन और रैना 

  प्रभु, बुढ़ापा ऐसा देना। 

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 भले आँख पर चश्मा हो 

  पर टी वी, अखबार पढ़ सकूं। 

पास हों या फिर दूर रहें 

मित्रों से मैं बात कर सकूँ।। 

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चाट पकोड़ी, पानी पूरी,

खा पाऊं, लेकर चटखारे 

 बीमारी और कमजोरी,

 फटक न पाएं पास हमारे

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 सावन सूखा, हरा न भादों ,

रहे हमेशा मन में चैना 

 प्रभु, बुढ़ापा ऐसा देना।

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 मेरे जीवन की शैली पर ,

  नहीं कोई प्रतिबंध लगाए।

  जीवन-साथी साथ रहे 

   संग संग हम दोनों मुस्काएं।।

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नहीं आत्म सम्मान से कभी,

करना पड़े हमें समझौता। 

बाकी तो जो, लिखा भाग्य में,

जो होना है, वो ही होता ।।

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 करनी ऐसी करूँ, गर्व से ,

 मिला सकूं मैं सबसे नैना।

  प्रभु, बुढ़ापा ऐसा देना।

   यही है ईश्वर से प्रार्थना।

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   जोरसे बोलो------ जय राम जी की।

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