विभाजन विभिषिका दिवस पर विस्थापित सिंधी परिवारों के सदस्यों को किया सम्मानित

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विभाजन विभिषिका दिवस पर विस्थापित सिंधी परिवारों के सदस्यों को किया सम्मानित

मथुरा। स्वतंत्रता दिवस से पूर्व कलेक्ट्रेट सभागार में मथुरा प्रशासन द्वारा उन परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया गया, जो भारत पाकिस्तान विभाजन के कारण विस्थापित हुए थे।

देश के इतिहास के सबसे दर्दनाक और हृदयविदारक अध्यायों में से एक, भारत विभाजन की त्रासदी को स्मरण कर, उसके पीड़ादायक परिणामों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से मथुरा प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट सभागार में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रदेश के केबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण जी, विधायक पूरन प्रकाश जी तथा जिलाधिकारी ने विभाजन के कारण विस्थापित हुए परिवारों के सदस्यों को सम्मानित किया, जिसमें सिंधी समाज से नारायण दास लखवानी, तुलसीदास गंगवानी, बसंत मंगलानी, चंदनलाल आडवानी, सिंधी लेखक एवं प्रवक्ता किशोर इसरानी, मलिक अरोड़ा, जगदीश चावला, के एल जुनेजा आदि को शाल पहनाकर पुष्प भेंट किया गया।

कार्यक्रम में विभाजन से संबंधित फिल्म को दिखाया गया, जिसको देख कर सभी की

आंखों में आँसू आ गए तथा लोग भावुक हो गए।

कार्यक्रम में विभाजन के दौरान विस्थापित परिवार के सदस्य नारायण दास लखवानी ने अपने परिवारजनों द्वारा बताए गए विभाजन के दृश्य एवं एहसास को सांझा करते हुए कहा कि देश का विभाजन किसी विभीषिका से कम नहीं था। भारत के लाखों लोगों ने बलिदान देकर आजादी प्राप्त की थी। ऐसे समय पर देश का दो टुकड़ों में बँट जाने का दर्द लाखों परिवारों में एक गहरे जख्म की तरह घर कर गया। भारत के इस भौगोलिक बंटवारे ने देश के लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा मानसिक रूप से झकझोर दिया था। उन्होंने कहा कि सत्य घटनाओं पर आधारित त्रासदी की डाक्यूमेन्ट्री फिल्म देखने के बाद जो अन्तर्मन से पीड़ा निकली है वह बहुत ही दर्दनाक है और विभाजन के समय की त्रासदी को जिस परिवार ने झेला है हम उसकी कल्पना भी नही कर सकते है। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें न सिर्फ भेद-भाव एवं दुर्भावना को खत्म करने की याद दिलायेगा बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानव सशक्तीकरण की प्रेरणा मिलेगी।
         
सिंधी लेखक एवं प्रवक्ता किशोर इसरानी ने कहा कि हमारे बुजुर्गों द्वारा इस आजादी में अपने परिवारों की कुर्बानी दी जिन्होंने अपनी जन्म भूमि छोड़कर अखंड भारत के विभाजन में जिसको जहां भी जो स्थान मिला वहीं ठहर गया शुरुआत में बहुत संघर्ष किया, लेकिन हमारे बुजुर्गों ने मेहनत और ईमानदारी को संबल बनाते हुए आत्मविश्वास के साथ हर क्षेत्र में उच्च मुकाम को हासिल किया, आज चाहे व्यापार हो या फिल्म जगत या फिर राजनीतिक भूमिका में हर जगह सिंधी समाज का प्रतिनिधित्व मिलेगा।-

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