इंदुलेखा देवी ने यमुना में जलसमाधि लेने का किया प्रयास

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श्रीकृष्ण को पति मानने वाली इंदुलेखा देवी ने यमुना में जलसमाधि का किया प्रयास, ब्रज को मांस-मदिरा मुक्त करने की मांग ।

वृन्दावन (मनीष शर्मा)। राधा-कृष्ण की पावन नगरी वृन्दावन में उस समय हड़कंप मच गया, जब भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मानने वाली देवी इंदुलेखा सोमवार को शृंगार घाट पर यमुना नदी में जलसमाधि लेने पहुंच गईं। मामले की भनक लगते ही वृन्दावन कोतवाली प्रभारी संजय कुमार पांडेय पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सूझबूझ दिखाते हुए इंदुलेखा देवी को समझा-बुझाकर सुरक्षित यमुना नदी से बाहर निकाला। यमुना से बाहर आने के बाद इंदुलेखा देवी ने कोतवाली प्रभारी को जिलाधिकारी के नाम एक मांग पत्र सौंपा। इस मांग पत्र में उन्होंने संपूर्ण ब्रज क्षेत्र को मांस, मदिरा और अंडा मुक्त घोषित करने की कड़े शब्दों में मांग की है।

मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए भावुक इंदुलेखा देवी ने कहा मैं पिछले तीन वर्षों से वृन्दावन में रह रही हूं। इस पवित्र नगरी में जहां कभी राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाएं हुई थीं, वहां आज शराब की लीलाएं देखने को मिल रही हैं। जब यह सब मेरी बर्दाश्त से बाहर हो गया, तो मैं यमुना महारानी की शरण में जलसमाधि लेने चली आई। मैंने मां यमुना से प्रार्थना की कि जिस तरह धरती मां ने सीता मैया को अपने आंचल में स्थान दिया था, उसी तरह वे भी मुझे अपने भीतर समा लें, क्योंकि मुझसे ब्रज की यह दुर्दशा और नहीं देखी जाती।

इंदुलेखा देवी ने बाहर से आकर वृन्दावन में कथा और भागवत करने वाले बड़े संतों और कथावाचकों पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया बाहर से लोग यहां आते हैं, कथा करके करोड़ों रुपये कमाते हैं और आलीशान आश्रमों में ऐश ओ आराम की जिंदगी जीते हैं।बड़ी-बड़ी गाड़ियों के काफिलों में घूमने वाले इन लोगों की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है।इन्होंने कभी भी ब्रज को मांस-मदिरा से मुक्त कराने के लिए आवाज नहीं उठाई। ये लोग सिर्फ धन बटोरने में लगे हैं। अब ब्रज को ऐसे पाखंड से मुक्त कराना ही होगा।

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