आषाढ़ मास गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से प्रारंभ

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रामदास चतुर्वेदी। मथुरा 14 जुलाई 2026

ज्योतिष शास्त्र में आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से प्रारंभ गुप्त नवरात्रि को आध्यात्मिक और तांत्रिक सिद्धियों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। वर्ष में दो बार आने वाली गुप्त नवरात्रि आंतरिक ऊर्जा जागृत करने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रेष्ठ मानी गई है।

यह विचार श्री दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के गोपाल गली स्थित कैंप कार्यालय पर आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने व्यक्त करते हुए कहा कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति साधना के अनुकूल होती है। उन्होंने आषाढ़ मास में पांच मंगलवार को देश दुनिया के लिए अत्यंत नाजुक बताया और सभी से हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड एवं हनुमान जी की स्तुति करने का आग्रह किया।
गोष्ठी में आचार्य ब्रजेन्द्र नागर एवं ज्योतिषाचार्य दीपक चतुर्वेदी ने कहा कि 26 जुलाई से शनि ग्रह वक्र गति से चलेगा 10 दिसम्बर तक पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाओं व राजनीतिक उथल-पुथल से भारी नुक्सान की संभावना है। उन्होंने गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं जैसे काली,तारा, त्रिपुरसुंदरी ध्रूमावती आदि की पूजा का विशेष महत्व बताया।
इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य पंकज चतुर्वेदी एवं साहित्याचार्य शरद चतुर्वेदी ने कहा कि गुप्त नवरात्रि में दुर्गासप्तशती, सुन्दरकाण्ड, रुद्राभिषेक आदि धार्मिक अनुष्ठानों से ग्रहों की शान्ति होगी और घर परिवार व देश दुनिया में शान्ति रहेगी।
गोष्ठी का संचालन करते हुए पूर्व पार्षद रामदास चतुर्वेदी शास्त्री ने गुप्त नवरात्रि के पौराणिक मान्यताओं पर प्रकाश डाला।

गोष्ठी में भागवताचार्य धीरेन्द्र शास्त्री,सौरभ शास्त्री, ऋषभ देव, गोविंद देव, मनोज पाठक, मनीष पाठक, निरंजन शास्त्री, प्रियांशु आदि ने भी गुप्त नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डाला और आषाढ़ मास में ग्रहों की स्थिति पर अवगत कराते हुए सभी से पूजा पाठ अनुष्ठान एवं धर्म कार्य करते रहने की सलाह दी।

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