श्रीकृष्ण की नगरी में हुआ सिंधी कवियों का संगम

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राम खत्री। मथुरा 29 जुलाई 2026

श्रीकृष्ण की नगरी मे सिंधी कवियों का संगम हुआ। हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार एवं वीर रस की कविताएं सुनाकर सिंधी कवियों ने कभी चेताया तो कभी हंसाया। एक से बढ़कर एक कविताएं सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।

उप्र सिंधी अकादमी के तत्वावधान में होटल ब्रजवासी रॉयल में अखिल भारतीय सिंधी कवि सम्मेलन हुआ, जो मंगलवार देर सायं तक चला, जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए सिंधी कवियों ने सिंधी में काव्य रचनाएं प्रस्तुत कर समा बांध दिया। कार्यक्रम की मेजबानी तरूण लखवानी के संयोजन में सिंधी नवयुवक मंडल ने की।

भोपाल से आए उस्ताद कवि नारी लच्छवाणी ने " कोई कश्मीरी कोई मद्रासी, सिंधी एक ही भारतवासी " सुनाकर सिंधीजनों की पहचान बताई, वहीं कुछ मधुर गीत " गीत लिखता हूं गाने के लिए, किसका दिल धड़काने के लिए"  , " रिमझिम रिमझिम पसंद आने लगी है " सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। मप्र के नर्मदापुरम से आए प्रसिद्ध हास्य कवि महेश मूलचंदानी ने " मुझे तुमसे इश्क क्या हुआ है, लोग कहते हैं शहर में एक पागल और बढ़ा है " सुनाकर हास्य रंग बिखेरे " वहीं " अपनी मेहनत और दिमाग की खाते हैं सिंधी, वीराने में बाग लगाते हैं सिंधी " सुनाकर सिंधियों की तारीफ की। महाराष्ट्र के कल्याण से आयीं कवयित्री प्रिया वच्छानी ने " हम तारीख लिखने वाली कौम हैं, हा सिंधियों ने रचा है इतिहास " सुनाकर तालियां बटोरी। इंदौर से आए युवा कवि नमोश तलरेजा ने " सिंधू माता मेरी जननी तुम और शीश नवाऊं मैं, जल आँखों से लगाऊँ मैं " सुनाकर सिंधीयत की जननी सिंधु नदी को प्रणाम किया। भोपाल की कवयित्री हर्षा मूलचंदानी ने " कुछ दर्दों की दवा नहीं किसी भी दवाखाने में, कुछ दर्द दूर होते हैं सिर्फ मुस्कुराने से "  सुनाकर तालियां बटोरी।

सिंधी काव्यक्षेत्र में पहली बार उतरे कार्यक्रम के सूत्रधार किशोर इसरानी ने " याद आती हैं बचपन की बातें " मुक्त कविता तथा " सदाएं दे रहा हूं तुमको अब तो वापस आ जाओ " गीत प्रस्तुत कर सबकी शाबाशी प्राप्त की।

प्रयागराज से आए अनुभवी कवि श्रीचंद भागिया ने " मां की कोख में जान गए नाड़ियों में बह रहे लाल रक्त को तभी तो सबसे पहले पहचाना अपनी मां को " सुनाकर मां की कोख का महत्व बताया। राजस्थान के टोंक से आयीं युवा कवयित्री योग्यता इसरानी ने " ‌तुम्हारी यादों के झोंकों से घिरा ये मन तरस रहा है और तड़प रहा है, मानता नहीं, संभालता नहीं" तथा उरई से आयीं कवयित्री पूजा रावलानी ने सेहतभरी कविता " सेहत ही असली दौलत है, सेहतमंद रहकर मन में उत्साह जगाएं " सुनाई, वहीं आगरा से आए बाल कवि कुनाल चावला ने गुरूपूर्णिमा के मौके पर " बच्चों ने जो सीखा, अपने बड़ों से सीखा " सुनाकर माता पिता को पूजे बिना सभी जगहों पर माथा टेकना व्यर्थ बताया।

कार्यक्रम में आगरा से आए प्रदेश अध्यक्ष नारायणदास पारवानी, आगरा अध्यक्ष राज कोठारी, रूपचंद धनवानी, नंदलाल टिलवानी, नारायणदास लखवानी, बसंतलाल मंगलानी, सुरेश मेठवानी, जीवतराम चंदानी, प्रदीप उकरानी, कन्हैयालाल भाईजी, जितेंद्र लालवानी, चंदनलाल आडवानी, गिरधारी नाथानी, मनोहर मंगलानी, तरूण नाजवानी, दीपक टेकवानी, रवि चंदानी, ताराचंद चेतवानी, ललित नाथानी, मुकेश कोतकवानी, दिनेश केवलानी, सतीश मंगलानी, धर्मेंद्र लालवानी, जितेंद्र उतवानी सहित सभी कवियों ने भगवान झूलेलाल एवं स्वामी लीलाशाह जी की छवि के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की। भरतपुर से आए गायक हेमंत गोपलानी ने प्रार्थना कराई। ब्रज की कवयित्री चंद्रा खत्री ने मंच का संचालन कर सबको बांधे रखा।

आयोजकों द्वारा आमंत्रित कवियों का स्मृति चिन्ह एवं मथुरा का प्रसाद भेंट कर शाल ओढ़ाकर एवं मोतीमाला पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान सिंधी जनरल पंचायत और लाड़ी लोहाणा सिंधी पंचायत सहित मथुरा के समस्त सिंधी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा मथुरा के महिला संगठनों से जुड़ी महिलाओं की उत्साहजनक भागीदारी रही। 

उप्र सिंधी अकादमी के निदेशक अभिषेक कुमार अखिल ने सफल कार्यक्रम के लिए देशभर कविजनों, कार्यक्रम के सूत्रधार किशोर इसरानी, संयोजक तरूण लखवानी तथा सहयोगी संस्था सिंधी नवयुवक मंडल एवं सिंधी जनरल पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों को बधाई देकर आभार जताया।

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