आंतरिक स्वतंत्रता और ब्रह्मज्ञान के संदेश संग निरंकारी मिशन का मुक्ति पर्व पर भव्य आयोजन

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किशोरी स्वर्ण इसरानी। मथुरा 16 अगस्त 2026

हाइवे नवादा स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आंतरिक स्वतंत्रता और ब्रह्मज्ञान के संदेश संग निरंकारी मिशन के मुक्ति पर्व पर सत्संग आयोजित किया गया, जिसमें निरंकारी संत श्री एस के रावत जी सहित श्रद्धालु भक्तों ने युगपुरुष बाबा अवतार सिंह जी, जगत माता बुद्धवंती जी, प्रथम प्रधान संत लाभ सिंह जी, निरंकारी राजमाता कुलवंत जी, युगनिर्माता माता सविंदर हरदेल जी सहित उन महान संत विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए श्रद्धा-सुमन अर्पित किए, जिनके त्याग एवं समर्पण ने मानवता को मुक्तिमार्ग की ओर अग्रसर किया। 

मीडिया सहायक किशोर स्वर्ण ने बताया कि मुक्ति पर्व का मुख्य आयोजन परम श्रद्धेय सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन सान्निध्य में दिल्ली के बुराड़ी रोड स्थित निरंकारी चौक के विशाल ग्राउंड में श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में आयोजित हुआ। विदेशों की विस्तृत कल्याणकारी प्रचार यात्रा के सफल समापन के लम्बे अंतराल के उपरांत सतगुरु के पावन दर्शन एवं आशीर्वचन का लाभ मथुरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु भक्तों ने प्राप्त किया। 

मन के बंधनों से आजादी ही वास्तविक मुक्ति

मुक्ति पर्व पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने फरमाया कि सच्ची मुक्ति बाहरी बंधनों से नहीं, बल्कि नफरत, अहंकार, छोटी सोच और पूर्वाग्रहों से मुक्त होने में है। हर सांस में निराकार का एहसास रखते हुए प्रेम, भक्ति और स्वीकार्यता से जीना ही जीते-जी मुक्ति है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, भीतर की शांति, प्रेम और सकारात्मकता की रोशनी सदैव कायम रखें। संतों की शिक्षाओं को केवल सुनना नहीं, बल्कि विचार, कर्म और जीवन में उतारना ही वास्तविक साधना और मुक्ति का मार्ग है। 

सतगुरु माता जी ने इस पावन दिवस को उन सभी अनन्य भक्तों एवं समर्पित सेवादारों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा अर्पित करने का अवसर बनाया, जिन्होंने अपने तन, मन और जीवन को निःस्वार्थ भाव से मिशन एवं मानवता की सेवा में समर्पित किया। उन्होंने प्रेरक विभूतियों के भक्तिमय जीवन तथा उनके द्वारा दी गई अनमोल सिखलाईयों का भी जिक्र किया।

मथुरा के जोनल इंचार्ज श्री एच के अरोड़ा जी ने बताया कि संपूर्ण भारतवर्ष जहाँ स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रभक्ति, गौरव और उल्लास के साथ मना रहा था, वहीं संत निरंकारी मिशन ने इस ऐतिहासिक अवसर पर ब्रह्मज्ञान द्वारा प्रदत्त आंतरिक स्वतंत्रता के दिव्य संदेश को भी जन-जन तक पहुँचाया। यह पर्व इस सत्य को साकार करता है कि वास्तविक मुक्ति बाहरी बंधनों से नहीं, बल्कि अज्ञान, अहंकार और भेदभाव से मुक्त होकर आत्मबोध एवं परमात्मबोध की अनुभूति में निहित है। निसंदेह मुक्ति पर्व का मूल भाव यही है कि जैसे भौतिक स्वतंत्रता राष्ट्र की प्रगति और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है, वैसे ही ब्रह्मज्ञान की दिव्य ज्योति मानव को अपनी वास्तविक पहचान का बोध कराते हुए प्रेम एवं सद्भाव के पावन मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करती है।

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