सोहम आश्रम में किया गया संस्कृत भारती के वार्षिक पंचांग का विमोचन

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रामदास चतुर्वेदी। 27 अप्रैल 2026

संस्कृत भारती ब्रजप्रांत द्वारा विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी भारतीय काल गणना के अनुसार सर्व समाज में तिथि,वार, त्यौहार , पर्व उत्सव आदि जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ विक्रम संवत् 2083 के वार्षिक पंचांग का विमोचन वृन्दावन परिक्रमा मार्ग स्थित सोहम आश्रम में परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी सत्यानंद जी महाराज एवं स्वामी श्री गौरवानन्द जी महाराज के करकमलों से वैदिक विधि विधान पूर्वक पूजन कर किया गया।
इस अवसर पर संस्कृत भारती ब्रजप्रांत मंत्री धर्मेन्द्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि गुलामी के काल खंड में हम अपने गौरवशाली अतीत व उसकी काल गणना को भूलकर पाश्चात्य संस्कृति को अपनाने लगे हैं।हम अपने भारतीय महिने तिथि और अपनी परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं। परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी सत्यानंद जी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पंचांग वैदिक ज्योतिष शास्त्र पर आधारित समय गणना का एक पारम्परिक तरीका है। यह सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर वार, तिथि, नक्षत्र,योग और करण पांच अंग के माध्यम से शुभमुहूर्त, व्रत, त्यौहार और ग्रहों की स्थिति की सटीक जानकारी देता है।
स्वामी गौरवानन्द जी महाराज ने कहा कि पंचांग भारतीय संस्कृति में धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए परिवार में अति आवश्यक है।
संस्कृत भारती मथुरा  अध्यक्ष आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने संस्कृत भारती के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सभ्यता संस्कार और परम्पराओं को सुरक्षित रखने के लिए संस्कृत भारती संकल्पित है अपने तिज त्योहार, तिथि नक्षत्र, विवाह शादी एवं अन्य मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त की जानकारी एवं मनुष्य के  जन्म से मृत्यु तक सभी संस्कारों की जानकारी प्राप्त करने के लिए परिवार में पंचांग का होना अति आवश्यक है।
संस्कृत भारती ब्रजप्रांत न्यास सचिव गंगाधर अरोड़ा ने कहा भारतीय पंचांग का इतिहास वैदिक काल हजारों वर्ष ईसा पूर्व से जुडा है जो सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित एक वैज्ञानिक समय गणना प्रणाली है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्कृत भारती के प्रचार प्रमुख रामदास चतुर्वेदी शास्त्री ने कहा कि पंचांग प्रत्येक परिवार का पथ-प्रदर्शक है ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे ऋषि मुनियों ने पृथ्वी, सूर्य, चन्द्रमा एवं अन्य नक्षत्रों की सटीक जानकारी प्राप्त हो सके इस उद्देश्य से पंचांग का निर्माण किया।
कार्यक्रम के अन्त में हरस्वरुप यादव ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कल्याण मंत्र कर कार्यक्रम का समापन किया।
केशव वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य रविन्द्र शर्मा एवं सहायक आचार्य सुधाकर शुक्ला ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में सोहम आश्रम के भक्त गणों के अलावा सोहम आश्रम के स्वामी मुकुन्द नन्द जी स्वामी, स्वामी रामानन्द जी, स्वामी शिवानंद जी स्वामी ज्ञानानंद जी आदि भारी संख्या में आश्रम के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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