मथुरा- जवाहर बाग हिंसा के 10 साल बाद भी अधूरी सम्मान की मांग, शहीद दर्जे को लेकर फिर उठी माँग

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मथुरा। 02 जून 2026

मथुरा के चर्चित जवाहर बाग कांड को 10 वर्ष पूरे होने पर एक बार फिर तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग उजागर हुई। इस बीच उनकी पत्नी अर्चना द्विवेदी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि एक दशक बीत जाने के बावजूद उनके पति को आधिकारिक रूप से वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसके वे वास्तविक हकदार थे।

अर्चना द्विवेदी का कहना है कि मुकुल द्विवेदी ने कानून व्यवस्था बनाए रखने और समाज की सुरक्षा के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए प्राणों की आहुति दी थी। उनके अनुसार, हर वर्ष पुण्यतिथि पर जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचते हैं तथा परिवार को उचित सम्मान दिलाने का आश्वासन भी देते हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि 2 जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई थी। उस समय रामवृक्ष यादव के नेतृत्व वाले ‘स्वाधीन भारत सुभाष सेना’ संगठन ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में जब पुलिस और प्रशासन की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची, तब वहां मौजूद उपद्रवियों ने सुरक्षाबलों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

इस हिंसक टकराव में तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव की मृत्यु हो गई थी। पूरे घटनाक्रम में दो पुलिस अधिकारियों सहित कुल 29 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। मृतकों में 27 सत्याग्रही भी शामिल थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की थी।

जवाहर बाग कांड की दसवीं बरसी पर अर्चना द्विवेदी के बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक लोग सवाल उठा रहे हैं कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों को आज तक आधिकारिक शहीद का दर्जा क्यों नहीं दिया गया।

स्थानीय नागरिकों और कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले अधिकारियों के बलिदान को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। संगठनों ने सरकार से इस मामले में जल्द निर्णय लेने और दिवंगत अधिकारियों को सम्मानजनक पहचान देने की मांग की है।

अर्चना द्विवेदी ने कहा कि उनका परिवार वर्षों से ऐसे निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसका आश्वासन उन्हें लगातार मिलता रहा है। उन्होंने सरकार से संवेदनशील रुख अपनाने और इस लंबे समय से लंबित मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की अपील की है।

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