जिला गंगा, पर्यावरण एवं वृक्षारोपण समिति की समीक्षा बैठक

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जिला गंगा, पर्यावरण एवं वृक्षारोपण समिति की समीक्षा बैठक

मथुरा 24 अप्रैल 2026/ जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह जी की अध्यक्षता में जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति एवं जिला वृक्षारोपण समिति की समीक्षा बैठक हुई संपन्न। जनपद की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का संचालन प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग श्री वेंकट श्रीकर पटेल द्वारा किया गया।
            बैठक के प्रथम चरण में यमुना नदी की स्वच्छता और सहायक जल निकायों के संरक्षण पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने औद्योगिक प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़े लहजे में निर्देशित किया कि जनपद के उन सभी ईंट-भट्टों का गहन सर्वेक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें जो बिना वैध अनुमति के संचालित हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन भट्टों पर कार्रवाई करने पर बल दिया जिन्होंने शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक 'हरित पट्टी' (Green Belt) विकसित नहीं की है।
​प्रभागीय निदेशक ने अवगत कराया कि जिला गंगा समिति के पिछले निर्णयों के अनुपालन में 'राधा कुंड वन ब्लॉक' के जीर्णोद्धार और सफाई का कार्य अत्यंत पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के साथ किया गया है। इस उपलब्धि पर जिलाधिकारी एवं समिति के समस्त सदस्यों ने संतोष व्यक्त किया।
            जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि राधा कुंड को एक 'आदर्श कुंड' (Model Pond) के रूप में विकसित किया जाए, जो अन्य जनपदों के लिए भी नजीर बने। उन्होंने वन विभाग को निर्देशित किया कि राधा कुंड की तर्ज पर ही जिले के अन्य प्राचीन और धार्मिक महत्व के कुंडों का भी कायाकल्प किया जाए, जिसके लिए जिला गंगा समिति के माध्यम से निरंतर बजट की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, सिंचाई विभाग और जल निगम (ग्रामीण) को निर्देशित किया गया कि वे यमुना नदी के किनारे प्रस्तावित निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स और STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की कार्यक्षमता की रिपोर्ट हर माह प्रस्तुत करें।
              वृक्षारोपण समिति की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आगामी मानसून सत्र में वृक्षारोपण को केवल एक लक्ष्य पूर्ति का जरिया नहीं, बल्कि एक 'जन-भागीदारी' (Public Participation) कार्यक्रम के रूप में मनाया जाए। उन्होंने प्रभागीय निदेशक को निर्देशित किया कि मुख्य विकास अधिकारी (CDO) मथुरा के साथ मिलकर एक सूक्ष्म कार्ययोजना (Micro Plan) तैयार करें।
             ​प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक 'आदर्श वृक्षारोपण स्थल' (Model Plantation Site) का चयन किया जाएगा, जहाँ पौधों की सिंचाई, निराई-गुड़ाई और सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक और टिकाऊ प्रबंध किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वृक्ष लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उनका संरक्षण है, ताकि वे भविष्य में वृक्ष का रूप ले सकें।
​3. आर्द्र भूमि (Wetlands) का संरक्षण एवं अतिक्रमण मुक्ति
​बैठक के अंतिम चरण में जनपद की पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण 'आर्द्र भूमियों' (Wetlands) पर विस्तृत चर्चा हुई। 
           जिलाधिकारी ने जनपद के समस्त उप जिलाधिकारियों (SDMs) को सख्त निर्देश दिए कि वे वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर अधिसूचित और संभावित आर्द्र भूमियों का सीमांकन करें। यदि कहीं अवैध कब्जा पाया जाता है, तो उसे तत्काल अभियान चलाकर मुक्त कराया जाए। उन्होंने कहा कि आर्द्र भूमियां भू-जल स्तर को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं, और इनके संरक्षण में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
           ​बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने उपस्थित सभी अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि, "पर्यावरण की सुरक्षा केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी का नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है। हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज अपनी प्रकृति, नदियों और वनों का कितना संरक्षण और संवर्धन करते हैं। हम सभी की सामूहिक सहभागिता से ही मथुरा को एक स्वच्छ और हरित जनपद बनाया जा सकता है।

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